Category: Stories

मेरे कान्हा जाने

मेरे कान्हा जाने बलदेव अपने परिवार के साथ सकुशल रह रहा था।  सब कुछ ठीक चल रहा था परन्तु बलदेव हमेसा किसी न किसी परेशानी में उलझा रहता था या यूँ कहिये की वो कोई न कोई समस्या मोल ले लेता था।  समस्या किस घर में नहीं होती पर क्या.

बोध कथा भाग – 2  (पत्थर)

बोध कथा भाग – 2  (पत्थर)   धनिया हिमाचल के अपने छोटे से गांव लखीमपुर में बड़े आनंद से रह रही थी उसके दो बेटे थे हीरा और जोगी, दोनों ही बड़े मेहनती थे।  दोनों बच्चे अपनी माँ के हर काम में हाथ बटाते, इतने मेहनती बच्चे की खेत में.

चिंता  (बोध कथा  भाग -1)

                  चिंता  (बोध कथा  भाग -1) फाल्गुनी अपने पति के साथ सुख पूर्वक उत्तर भारत के एक गांव हीरापुर में बड़े चैन आराम से जीवन व्यतीत कर रही थी।  फाल्गुनी बचपन से ही बड़ी धार्मिक व् उच्च विचारों वाली थी। उसने उच्च.

बंजर कारखाने

बंजर कारखाने “आप आ गए, मैं आपके लिए चाय बना लाती हूँ, तब तक आप हाथ मुँह धो लीजिये तौलिया भी वहीं रखा हुआ है।” कहते हुए सीमा जल्दी से रसोई की और चली गई। प्रमोद भी थका हुआ था उसने ऑफिस की ड्रेस उतारी और जल्दी से हाथ मुँह.

Fear of Death

                                                                                 Fear of Death Do you know who was king Parikshit? I think most of the sanatanis know him well. He was the son of Abhimanyu and grandson of Arjuna from Kuru vans (kuru Dynesty), Arjun and his four brother latter known as pandav. They had won the battle of.

वीर सावरकर

वीर सावरकर   भारत  की स्वतंत्रता में वीर सावरकर का योगदान अतुलनीय है। इनका जन्म 28  मई 1883  को हुआ। इन्होने अपने स्कूल के दिनों से ही भारत की स्वतंत्रता के लिए काम करना शुरू कर  दिया था, अपने भाई के साथ अभिनव भारत सोसाइटी का गठन किया। इंग्लैंड में.